Geet-pahal

गीत-पहल

साहित्यिक-हलचल

 
गीत-पहल का हुआ विमोचन 

मुरादाबाद। 24 अक्तू . 2010. साहित्यिक ई-पत्रिका गीत-पहल का शिव मंदिर सभागार हिमगिरि कालोनी

में लोकार्पण किया गया। इस पत्रिका में अभी

तक देशभर के 52 गीतकारों के नवगीत सम्मिलित किए गए हैं। इसमें विशिष्ट रचनाकार, उनकी रचनाओं, संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा, मत-मतांतर, साहित्यिक हलचल आदि का समावेश किया गया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार डा.बुद्धिनाथ मिश्र, विशिष्ट अतिथि डॉ.महेश दिवाकर और शचींद्र भटनागर ने इस क़दम की सराहना की। संपादक मंडल सदस्य अवनीश सिंह चौहान ने बताया कि गीत-पहल पूरी तरह गीत और नवगीत को समर्पित ई-पत्रिका है। योगेंद्र वर्मा व्योम ने इस कोशिश का मक़सद गीतों को विश्र्व पटल पर स्थान दिलाना बताया। अध्यक्षता माहेश्र्वर तिवारी ने एवं संचालन अवनीश सिंह चौहान ने किया। इस मौक़े पर आयोजित काव्यपाठ की रसधार में हर कोई डूब गया। वीरेंद्र सिंह बृजवासी ने जाति से कब कर्म निर्धारण हुआ, कर्म से ही जाति का निर्धारण हुआ, जो जिया इस सत्य के विपरीत जाकर, वही सबके कष्ट का कारण हुआ का पाठ कर जातीय वैमनस्यता को दूर करने की कोशिश की। मूलचंद राज ने जब भी उलझन में होता हूं याद बहुत आती है मां, चाहे जैसी भी उलझन हो चुटकी में सुलझाती मां का पाठ कर वात्सल्य का बोध कराया। इसके अलावा सतीश सार्थक, परवाना, डॉ. ऋचा निखिल, रामदत्त द्विवेदी, डॉ. ओमाचार्य, जितेंद्र कुमार जौली, यशपाल सिंह खामोश, नत्थूलाल शर्मा, डॉ. मीना नकवी, निखिलेश कुमार पाठक, योगेंद्र पाल सिंह विश्नोई, रघुराज सिंह निश्चल, मनोज वर्मा, शिशुपाल मधुकर, विवेक निर्मल आदि ने काव्यपाठ किया। तकनीकी सहयोग दिया राजीव कुमार (टी एम् यूं)  ने तथा संपादक मंडल सदस्य आनंद कुमार गौरव ने आभार व्यक्त किया।

आमतौर पर हमें पसंदीदा गीत नहीं मिल पाते। गीत-संग्रह की किताबें महंगी होने के कारण आम पाठक इस सुखद अनुभूति से वंचित रह जाते हैं तो कई बार पसंदीदा कवियों की किताबें नहीं मिल पाती। गीत प्रेमियों को परेशान होने की ज़रूरत नहीं। अब घर बैठे गीतों का आनंद ले सकेंगे। नेट पर साहित्यिक पत्रिकाएं तो कई हैं लेकिन गीत विधा की पत्रिकाएं न के बराबर हैं। गीतों को विश्व पटल पर स्थान दिलाने की तैयारी है। इस पुनीत कार्य को पूरा करने का बीड़ा मुरादाबाद के साहित्यकारों ने उठाया है। इस पत्रिका की ख़ास बात यह है कि इस इंटरनेट गीत पत्रिका में देश भर के नामचीन साहित्यकारों के अलावा क्षेत्रीय कवियों के गीत और नवगीत पढ़े जा सकेंगे। छंद को भूलती भावी पीढ़ी के लिए इसमें एक से बढ़कर छंद युक्त कविताओं को समाहित किया गया है। आम पाठकों के लिए भी छंद मुक्त कविताएं होंगी। गीत पहल के संपादक मंडल में शामिल अवनीश सिंह चौहान, आनंद गौरव, रमाकांत और योगेंद्र वर्मा व्योम आदि इसमें रंग भर रहे हैं। गीत पहल में कवियों के गीत, नवगीत के अलावा संस्मरण, साक्षात्कार, आलेख, मत-मतांतर और चित्रावली का समावेश किया गया है।

पावस गोष्ठी

मुरादाबाद. २२ जुलाई २०१० को डॉ माहेश्वर तिवारी के आवास पर साहित्यिक संस्था 'अक्षरा' के तत्वाधान में पावस गोष्ठी का आयोजन किया गया. गोष्ठी का शुभारम्भ सिद्धि भटनागर द्वारा प्रस्तुत संगीतवद्ध सरस्वती वंदना से हुआ. गोष्ठी में शहर के रचनाकारों- ओंकार सिंह 'ओंकार', कृष्ण कुमार नाज़', फक्कड़ मुरादाबादी, विवेक निर्मल, मनोज कुमार 'मनु', रघुराज सिंह 'निश्चल' आदि ने वर्षा ऋतु से सम्बंधित रचनाएँ पढ़ीं. बालसुंदरी तिवारी ने डॉ बुद्धिनाथ मिश्र का एक गीत संगीतवद्ध  कर प्रस्तुत किया. अध्यक्षता बृज भूषण सिंह गौतम 'अनुराग' ने, संचालन योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने तथा आभार अभिव्यक्ति डॉ माहेश्वर तिवारी ने की.

 

डॉ बुद्धिनाथ मिश्र को साहित्यार्जुन सम्मान

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मुरादाबाद. नवगीतकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र को विप्रा कला साहित्य मंच की ओर से सम्मानित किया गया. मानसरोवर कन्या इंटर कालेज नवीन नगर में आयोजित समारोह में उन्हें साहित्यार्जुन सम्मान से अलंकृत किया गया. यहाँ डॉ महेश्वर तिवारी, आनंद कुमार गौरव, योगेन्द्र वर्मा 'व्योम', अवनीश सिंह चौहान आदि ने डॉ मिश्र को सम्मानित किया. सम्मान समारोह में डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने एकल काव्य पाठ किया गया. कार्यक्रम में मीना नकवी, अनुराग गौतम, डॉ पूनम बंसल, सतीश सार्थक, ओंकार सिंह 'ओंकार', राम सिंह 'निशंक', समीर तिवारी, डॉ जयपाल सिंह 'व्यस्त', विवेक 'निर्मल', अजय अनुपम, ओमप्रकाश गुप्ता, बालसुंदरी तिवारी आदि ने डॉ मिश्र की सृजनात्मकता की सराहना की.

गीतकार राम अधीर को देवराज वर्मा उत्कृष्ट साहित्य      सृजन सम्मान

 

मुरादाबाद. ७ दिसंबर २००९. साहित्यिक संस्था 'अक्षरा' के तत्वाधान में मानसरोवर कन्या इंटर कालेज नवीन नगर के सभागार में स्व. देवराज वर्मा की चतुर्थ पुण्य तिथि पर सम्मान समारोह एवं गीत विमर्श संगोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें भोपाल के वरिष्ठ गीतकार राम अधीर को उनके गीत के प्रति समर्पण तथा साहित्य सृजन के लिए उन्हें वर्ष २००९ के देवराज वर्मा उत्कृष्ट साहित्य सृजन सम्मान से विभूषित किया गया. श्री अधीर को सम्मान स्वरुप प्रतीक चिन्ह, अंगवस्त्रम, मान पत्र, श्रीफल नारियल के साथ नगद धनराशि भी भेंट की गयी.

सम्मान समारोह एवं  श्री अधीर के काव्य पाठ के बाद शुरू हुई गीत विमर्श संगोष्ठी. वरिष्ठ नवगीतकार माहेश्वर तिवारी ने कहा कि "परम्परावादी गीतकार निजता में ही डूबा रहता है जबकि नवगीत का कवि बोध और समग्रता में गीत के संसार को विस्तार देता है. नवगीत भारतीय सन्दर्भ में अपनी जड़ों की तलाश और पहचान है." लखनऊ से पधारे मधुकर अष्ठाना ने विचार रखा कि "नवगीत वर्तमान में मानवीय समस्याओं से जूझते हुए मूल्यों की स्थापना के लिये प्रतिबद्ध है." राम अधीर का मत था कि "गीत को हम अनुशासन के बिना नहीं रच सकते." अवनीश सिंह चौहान ने कहा कि "आज का गीतकार अपने गीत में उपभोक्तावादी संस्कृति, सामाजिक विद्रूपताओं तथा वैज्ञानिक तथ्यों को उजागर करते हुए नए-नए रंग भर रहा है." कार्यक्रम में इसके आलावा गीतकार बृज भूषण सिंह गौतम 'अनुराग', शचिन्द्र भटनागर, डॉ ओम आचार्य, रामलाल 'अंजना' तथा रघुराज सिंह 'निश्चल' ने भी अपने विचार रखे. गोष्ठी में योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई, शिशुपाल मधुकर, रामदत्त द्विवेदी, कृष्ण कुमार 'नाज़', रामेश्वरी देवी, सतीश सार्थक, राम सिंह 'निशंक', राकेश्वर प्रसाद वशिष्ठ, अम्वरीश शर्मा, अंजू अग्रवाल, शिव अवतार 'सरस', विकास मुरादाबादी, नरेन्द्र वर्मा, विवेक निर्मल, राजेंद्र मोहन शर्मा श्रंग' आदि स्थानीय साहित्यकार भी उपस्थित रहे. अध्यक्षता माहेश्वर तिवारी, मुख्य अतिथि राम अधीर, विशिष्ट अतिथि मधुकर अष्ठाना एवं कार्यक्रम का संचालन आनंद कुमार 'गौरव' ने किया. अंत में संस्था के अध्यक्ष योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया.

'नये-पुराने' पत्रिका का डॉ बुद्धिनाथ मिश्र की रचनाधर्मिता पर केन्द्रित अंक इंटरनेट पर प्रकाशित

संपादक: दिनेश सिंह
कार्यकारी संपादक: अवनीश सिंह चौहान
सहयोग: ब्रह्मदत्त मिश्र, कौशलेन्द्र, आनंद कुमार 'गौरव' , योगेन्द्र वर्मा 'व्योम'
 



संपादक: नये-पुराने

अनुक्रम
   
संपादकीय   



बुद्धिनाथ मिश्र के प्रति


श्लेष गौतम

संस्मरण

 
उदयप्रताप सिंह   
माहेश्वर तिवारी   
लालसा लाल 'तरंग' 
ऋचा पाठक   
इम्तियाज़ अहमद गाज़ी


यादों के बहाने से 

   
विवेकी राय
श्रीराम परिहार   
यश मालवीय   
सुशीला गुप्ता   
काक   
सुधाकर शर्मा   
अनिल अनवर   
ओमप्रकाश सिंह   
मधु शुक्ला  
महाश्वेता चतुर्वेदी   
शिवम्‌ सिंह   

आलेख   
 

वेदप्रकाश 'अमिताभ'   
गिरिजाशंकर त्रिवेदी   
वशिष्ठ अनूप   
नन्दलाल पाठक
मधुकर अष्ठाना
सूर्यप्रसाद शुक्ल
मदनमोहन 'उपेन्द्र'
प्रेमशंकर रघुवंशी
प्रहलाद अग्रवाल
करुणाशंकर उपाध्याय


बातचीत
 

जयप्रकाश 'मानस'
वाल्मीकि विमल
जयकृष्ण राय 'तुषार'
एकलव्य


बक़लम ख़ुद

 

छायावादोत्तर गीतिकाव्य के विकास के पडाव और नवगीत
अक्षरों के शान्त नीरव द्वीप पर
वे ख़्वाब देखते हैं, हम देखते हैं सपना
'शत्‌ शत्‌ नमन्‌' कब तक करेंगे?
'घरही मे हमरा चारू धम हम मिथिले मे रहबै'


यात्रा-वृत्तान्त
 

एक दिन उर्विजा की जन्मभूमि पर
एक रात का वह सहयात्री


समीक्षा

जाल फेंक रे मछेरे!   
 

जितेन्द्र वत्स
आनन्द कुमार 'गौरव'
पारसनाथ 'गोवर्धन'


जाड़े में पहाड़
 

योगेन्द्र वर्मा 'व्योम'
प्रियंका चौहान
श्यामसुन्दर निगम


शिखरिणी
 

भारतेन्दु मिश्र
रामजी तिवारी
मनमोहन मिश्र


ऋतुराज एक पल का
 

रमाकान्त
लवलेश दत्त


संचयन
 

जाल फेंक रे मछेरे!
जाड़े में पहाड
शिखरिणी
ऋतुराज एक पल का
मैथिली कविताएँ


अंक के लेखकों के नाम-पते



इस माह के विशिष्ट रचनाकार :

                                                                       वीरेंद्र आस्तिक

 



सूरज लील लिए


हिरना

इस जंगल में

कब पूरी उम्र जिए


घास और पानी पर रहकर

सब तो, बाघों के मुंह से

निकल नहीं पाते

कस्तूरी पर वय चढ़ते ही

साये, आशीषों के

सर पर से उठ जाते

कस्तूरी के

माथे को

पढ़ते बहेलिए


इनके भी जो बूढ़े मुखिया होते

साथ बाघ के

छाया में पगुराते

कभी सींग पर बैठ

चिरैया गाती

या फिर मरीचिकाओं पर मुस्काते

जंगल ने

कितने

तपते सूरज लील लिए


पूर्णिमा वर्मन

 



आवारा दिन


दिन कितने आवारा थे

गली गली और

बस्ती बस्ती

अपने मन

इकतारा थे


माटी की

खुशबू में पलते

एक खुशी से

हर दुख छलते

बाड़ी, चौक, गली अमराई

हर पत्थर गुरुद्वारा थे

हम सूरज

भिनसारा थे


किसने बड़े

ख़्वाब देखे थे

किसने ताज

महल रेखे थे

माँ की गोद, पिता का साया

घर घाटी चौबारा थे

हम घर का

उजियारा थे